श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 316: योगका वर्णन और उसके साधनसे परब्रह्म परमात्माकी प्राप्ति  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.316.9 
धारणं चैव मनस: प्राणायामश्च पार्थिव।
एकाग्रता च मनस: प्राणायामस्तथैव च॥ ९॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वीनाथ! मन को किसी देश विशेष में स्थित करना 'धारणा' कहलाता है। मन को एकाग्र करके किया जाने वाला प्राणायाम सगुण है और किसी देश-विशेष का आश्रय लिए बिना निर्जला समाधि में मन को एकाग्र करना निर्गुण प्राणायाम कहलाता है। 9॥
 
Prithvinath! Establishing the mind in a particular country is called ‘Dharana’. Pranayama done with the concentration of the mind is Saguna and concentrating the mind in seedless samadhi without taking any country-specific shelter is called Nirguna Pranayama. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)