श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 316: योगका वर्णन और उसके साधनसे परब्रह्म परमात्माकी प्राप्ति  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.316.4 
यदेव योगा: पश्यन्ति तत् सांख्यैरपि दृश्यते।
एकं सांख्यं च योगं च य: पश्यति स तत्त्ववित्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
योगी जिस सत्य को अनुभव करता है, वही सांख्य भी देखता है; अतः जो सांख्य और योग को एक ही देखता है, वही सत्य का ज्ञाता है। ॥4॥
 
The truth which the Yogi realises is also seen by the Sankhyas; hence, the one who sees Sankhya and Yoga as one, is the knower of truth. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)