श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 316: योगका वर्णन और उसके साधनसे परब्रह्म परमात्माकी प्राप्ति  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  12.316.25 
स्वयुक्त: पश्यते ब्रह्म यत् तत्परममव्ययम्।
महतस्तमसो मध्ये स्थितं ज्वलनसंनिभम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
जो पुरुष समाधि में स्थित है, वह हृदय में स्थित सनातन परब्रह्म को उसी प्रकार अनुभव करता है, जैसे महान अंधकार के बीच में प्रज्वलित अग्नि चमकती है॥25॥
 
One who is well established in Samadhi, realizes the eternal Supreme Brahma situated in the heart, like a blazing fire that shines in the midst of great darkness. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)