श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 316: योगका वर्णन और उसके साधनसे परब्रह्म परमात्माकी प्राप्ति  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.316.21 
श्ङ्खदुन्दुभिनिर्घोषैर्विविधैर्गीतवादितै:।
क्रियमाणैर्न कम्पेत युक्तस्यैतन्निदर्शनम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
चाहे उसके अनेक शंख और नगाड़े बज रहे हों, नाना प्रकार के बाजे-गाजे बज रहे हों, तो भी उसका ध्यान भंग नहीं हो सकता। यह उसकी दृढ़ समाधि का लक्षण है॥ 21॥
 
Even if he has the sound of many conches and drums and various kinds of music and music are played, his meditation cannot be disturbed. This is the sign of his strong Samadhi.॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)