श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 316: योगका वर्णन और उसके साधनसे परब्रह्म परमात्माकी प्राप्ति  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.316.1 
याज्ञवल्क्य उवाच
सांख्यज्ञानं मया प्रोक्तं योगज्ञानं निबोध मे।
यथाश्रुतं यथादृष्टं तत्त्वेन नृपसत्तम॥ १॥
 
 
अनुवाद
याज्ञवल्क्य कहते हैं, "हे राजनश्रेष्ठ! सांख्य-विषयक ज्ञान तो मैं तुमसे कह चुका हूँ। अब तुम मुझसे योगशास्त्र का सारभूत ज्ञान सुनो, जो मैंने देखा, सुना और समझा है।" ॥1॥
 
Yagyavalkya says, "O best of kings! I have already told you the knowledge related to Sankhya. Now listen to the essential knowledge of Yoga Shastra from me as per what I have seen, heard and understood." ॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)