श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 315: प्रकृति-पुरुषका विवेक और उसका फल  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.315.2 
गुणैर्हि गुणवानेव निर्गुणश्चागुणस्तथा।
प्राहुरेवं महात्मानो मुनयस्तत्त्वदर्शिन:॥ २॥
 
 
अनुवाद
तत्त्वदर्शी महात्मा मुनि कहते हैं, गुणों के साथ जिसका सम्पर्क है, उसे गुणवान कहते हैं और जो गुणों के सम्पर्क से रहित है, उसे निर्गुण कहते हैं ॥2॥
 
Tatvadarshi Mahatma Muni says, the one who has contact with qualities is called virtuous and the one who is devoid of contact with qualities is called Nirguna. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)