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mahabharat 12.314.5-6h: अब मैं सत्व, रज और तम इन तीनों गुणों के संघर्ष 1 और शनिपात 2 का विस्तारपूर्वक वर्णन करता हूँ, सुनो ॥5 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.314: सात्त्विक, राजस और तामस प्रकृतिके मनुष्योंकी गतिका वर्णन तथा राजा जनकके प्रश्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.314.5-6h 
द्वन्द्वमेषां त्रयाणां तु संनिपातं च तत्त्वत:॥ ५॥
सत्त्वस्य रजसश्चैव तमसश्च शृणुष्व मे।
 
 
अनुवाद
अब मैं सत्व, रज और तम इन तीनों गुणों के संघर्ष 1 और शनिपात 2 का विस्तारपूर्वक वर्णन करता हूँ, सुनो ॥5 1/2॥
 
Now I describe the conflict 1 and Sanipat 2 of these three gunas - Sattva, Raja and Tama - in detail, listen. 5 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)