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mahabharat 12.314.17: और जब मरणासन्न मनुष्य की आत्मा उलटती है, तो उस समय वह समयानुसार किस स्थान को प्राप्त होती है? कृपया इस पर भी कुछ प्रकाश डालें॥17॥   |   mahabharat अध्याय 12.314: सात्त्विक, राजस और तामस प्रकृतिके मनुष्योंकी गतिका वर्णन तथा राजा जनकके प्रश्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 314: सात्त्विक, राजस और तामस प्रकृतिके मनुष्योंकी गतिका वर्णन तथा राजा जनकके प्रश्न  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.314.17 
तथैवोत्क्रामिण: स्थानं देहिनो वै विपद्यत:।
कालेन यद्धि प्राप्नोति स्थानं तत् प्रब्रवीहि मे॥ १७॥
 
 
अनुवाद
और जब मरणासन्न मनुष्य की आत्मा उलटती है, तो उस समय वह समयानुसार किस स्थान को प्राप्त होती है? कृपया इस पर भी कुछ प्रकाश डालें॥17॥
 
And when the soul of a dying person reverses, what place does he reach at that time according to the time? Please shed some light on this as well.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)