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त्वं हि विप्रेन्द्र कात्स्न्र्येन मोक्षधर्ममुपाससे।
साकल्यं मोक्षधर्मस्य श्रोतुमिच्छामि तत्त्वत:॥ १५॥
अनुवाद
हे ब्राह्मण! आप मोक्षरूपी धर्म का पूर्णतः पालन करते हैं, इसलिए मैं आपके मुख से मोक्षरूपी सम्पूर्ण धर्म को यथार्थ रूप में सुनना चाहता हूँ॥15॥
O Brahmin! You practice the Dharma of Moksha completely; therefore, I wish to hear the complete Dharma of Moksha in its true form from your mouth. ॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥