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mahabharat 12.314.11: नरेश्वर! आपने मुझसे अव्यक्त प्रकृति में स्थित परमात्मा के विषय में जो प्रश्न पूछा है, उसके उत्तर में निवेदन है कि यह परमात्मा केवल इसलिए प्रकृतिस्थ कहलाता है, क्योंकि यह प्राकृत शरीर में स्थित है। 11॥   |   mahabharat अध्याय 12.314: सात्त्विक, राजस और तामस प्रकृतिके मनुष्योंकी गतिका वर्णन तथा राजा जनकके प्रश्न   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.314.11 
अव्यक्तस्थं परं यत् तत् पृष्टस्तेऽहं नराधिप।
स एष प्रकृतिस्थो हि तत्स्थ इत्यभिधीयते॥ ११॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! आपने मुझसे अव्यक्त प्रकृति में स्थित परमात्मा के विषय में जो प्रश्न पूछा है, उसके उत्तर में निवेदन है कि यह परमात्मा केवल इसलिए प्रकृतिस्थ कहलाता है, क्योंकि यह प्राकृत शरीर में स्थित है। 11॥
 
Nareshwar! In response to the question you asked me about the Supreme Being situated in the unmanifested nature, it is submitted that this Supreme Being is called Prakritistha only because it is situated in the natural body. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)