श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 313: अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा सात्त्विक, राजस और तामस भावोंके लक्षण  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.313.5 
वागध्यात्ममिति प्राहुर्यथा श्रुतिनिदर्शिन:।
वक्तव्यमधिभूतं तु वह्निस्तत्राधिदैवतम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
वेदार्थ का चिंतन करने वाले विद्वानों के अनुसार वाणी आध्यात्मिक है, वाणी अलौकिक है और अग्नि दिव्य है ॥5॥
 
According to the scholars who contemplate on Vedartha, speech is spiritual, speech is supernatural and fire is divine. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)