vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 313: अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा सात्त्विक, राजस और तामस भावोंके लक्षण
»
श्लोक 4
श्लोक
12.313.4
हस्तावध्यात्ममित्याहुर्यथा संख्यानदर्शिन:।
कर्तव्यमधिभूतं तु इन्द्रस्तत्राधिदैवतम्॥ ४॥
अनुवाद
सांख्यदर्शी विद्वानों के कथनानुसार दोनों हाथ आध्यात्मिक हैं, कर्तव्य पराक्रम प्रधान हैं तथा इन्द्र इनके अधिष्ठाता देवता हैं।
According to the statement of Sankhyadarshi scholars, both the hands are spiritual, duty is overpowered and Indra is the presiding deity.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×