श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 313: अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा सात्त्विक, राजस और तामस भावोंके लक्षण  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.313.3 
उपस्थोऽध्यात्ममित्याहुर्यथा योगप्रदर्शिन:।
अधिभूतं तथाऽऽनन्दो दैवतं च प्रजापति:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
योगमत के साधकों के अनुसार, अध्यात्म विद्यमान है, कामसुख व्याप्त है और प्रजापति ही अधिष्ठाता देवता हैं ॥3॥
 
According to the practitioners of Yogamat, spirituality is present, sexual pleasure is prevalent and Prajapati is the presiding deity. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)