श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 313: अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा सात्त्विक, राजस और तामस भावोंके लक्षण  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.313.2 
पायुरध्यात्ममित्याहुर्यथा तत्त्वार्थदर्शिन:।
विसर्गमधिभूतं च मित्रस्तत्राधिदैवतम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
तत्त्ववेत्ता विद्वान् लोग गुदा को अध्यात्म कहते हैं। मलमूत्र अतिशय है और मित्र अतिशय है। 2॥
 
Philosophy wise scholars call anal as spirituality. Excretion is overpowered and friends are overpowered. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)