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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 313: अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा सात्त्विक, राजस और तामस भावोंके लक्षण
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श्लोक 16
श्लोक
12.313.16
यथा दीपसहस्राणि दीपान्मर्त्या: प्रकुर्वते।
प्रकृतिस्तथा विकुरुते पुरुषस्य गुणान् बहून्॥ १६॥
अनुवाद
जैसे मनुष्य एक ही दीपक से हजारों दीपक जला सकता है, वैसे ही प्रकृति मनुष्य के संबंध में अनेक गुण उत्पन्न करती है ॥16॥
Just as a man can light thousands of lamps from a single lamp, similarly nature produces many qualities in relation to man. ॥16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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