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mahabharat 12.313.1: याज्ञवल्क्यजी कहते हैं - राजन् ! तत्वदर्शी ब्राह्मण कहते हैं कि दोनों चरण आध्यात्मिक हैं, गन्तव्य प्रबल है और विष्णु ही अधिष्ठाता हैं ॥1॥   |   mahabharat अध्याय 12.313: अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा सात्त्विक, राजस और तामस भावोंके लक्षण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 313: अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा सात्त्विक, राजस और तामस भावोंके लक्षण  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.313.1 
याज्ञवल्क्य उवाच
पादावध्यात्ममित्याहुर्ब्राह्मणास्तत्त्वदर्शिन:।
गन्तव्यमधिभूतं च विष्णुस्तत्राधिदैवतम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
याज्ञवल्क्यजी कहते हैं - राजन् ! तत्वदर्शी ब्राह्मण कहते हैं कि दोनों चरण आध्यात्मिक हैं, गन्तव्य प्रबल है और विष्णु ही अधिष्ठाता हैं ॥1॥
 
Yajnavalkyaji says – King! Tatvdarshi Brahmins say that both the feet are spiritual, the destination is overpowered and Vishnu is the presiding deity. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)