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mahabharat 12.312.9-10: अपने आठ रूपों में प्रकट होकर, शक्तिशाली वायुदेव उस सात ज्वालाओं वाली अग्नि को निगल जाते हैं जो समस्त तत्त्वों को गर्म करके बड़े वेग से जलती है और ऊपर, नीचे और मध्य में, सब दिशाओं में बहने लगती है।॥9-10॥   |   mahabharat अध्याय 12.312: संहारक्रमका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 312: संहारक्रमका वर्णन  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  12.312.9-10 
तमप्रमेयोऽतिबलं ज्वलमानं विभावसुम्।
ऊष्माणं सर्वभूतानां सप्तार्चिषमथाञ्जसा॥ ९॥
भक्षयामास भगवान् वायुरष्टात्मको बली।
विचरन्नमितप्राणस्तिर्यगूर्ध्वमधस्तथा॥ १०॥
 
 
अनुवाद
अपने आठ रूपों में प्रकट होकर, शक्तिशाली वायुदेव उस सात ज्वालाओं वाली अग्नि को निगल जाते हैं जो समस्त तत्त्वों को गर्म करके बड़े वेग से जलती है और ऊपर, नीचे और मध्य में, सब दिशाओं में बहने लगती है।॥9-10॥
 
Appearing in his eight forms, the powerful Vayu Deva swallows that fire consisting of seven flames which heats up all elements and burns with great force and starts flowing in all directions, above, below and in the middle.॥ 9-10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)