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mahabharat 12.312.3: जब ब्रह्माजी देखते हैं कि उनका दिन समाप्त हो गया है, तब उन्हें रात्रि में सोने की इच्छा होती है, इसलिए वे अहंकार के अभिमानी देवता रुद्र को ब्रह्माजी का वध करने के लिए प्रेरित करते हैं ॥3॥   |   mahabharat अध्याय 12.312: संहारक्रमका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 312: संहारक्रमका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.312.3 
अह:क्षयमथो बुद्‍ध्वा निशि स्वप्नमनास्तथा।
चोदयामास भगवानव्यक्तोऽहंकृतं नरम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
जब ब्रह्माजी देखते हैं कि उनका दिन समाप्त हो गया है, तब उन्हें रात्रि में सोने की इच्छा होती है, इसलिए वे अहंकार के अभिमानी देवता रुद्र को ब्रह्माजी का वध करने के लिए प्रेरित करते हैं ॥3॥
 
When Lord Brahmā sees that his day has come to an end, he desires to sleep at night, so he inspires Rudra, the proud god of ego, to kill Lord Brahma. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)