एषोऽप्ययस्ते राजेन्द्र यथावत् समुदाहृत:।
अध्यात्ममधिभूतं च अधिदैवं च श्रूयताम्॥ १७॥
अनुवाद
राजेन्द्र! इस प्रकार मैंने तुम्हारे समक्ष संहारक्रम का यथावत् वर्णन किया है। अब तुम अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैव का वर्णन सुनो। 17॥
Rajendra! In this way I have described the sequence of carnage before you exactly. Now you listen to the description of spirituality, Adhibhuta and Adhidaiva. 17॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि याज्ञवल्क्यजनकसंवादे द्वादशाधिकत्रिशततमोऽध्याय:॥ ३१२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें याज्ञवल्क्य और जनकका संवादविषयक तीन सौ बारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३१२॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥