याज्ञवल्क्य उवाच
तत्त्वानां सर्वसंख्या च कालसंख्या तथैव च।
मया प्रोक्ताऽऽनुपूर्व्येण संहारमपि मे शृणु॥ १॥
अनुवाद
याज्ञवल्क्यजी कहते हैं - राजन्! अब मुझसे क्रमशः तत्त्वों की कुल संख्या, काल की संख्या और तत्त्वों के नाश के विषय में कहिए। 1॥
Yajnavalkyaji says – King! Now listen to me talking about the total number of elements, the number of times and the destruction of the elements respectively. 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥