Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.311.9: नरश्रेष्ठ! हमने सुना है कि देवता (श्रोत्र आदि इन्द्रियाँ) पितरों (पंचमहाभूतों) के पुत्र हैं, अर्थात् समस्त इन्द्रियाँ पंचमहाभूतों से उत्पन्न हुई हैं और वे सम्पूर्ण चराचर जगत के आश्रय में स्थित हैं, ऐसा हमने सुना है। | mahabharat अध्याय 12.311: अव्यक्त, महत्तत्त्व, अहंकार, मन और विषयोंकी कालसंख्याका एवं सृष्टिका वर्णन तथा इन्द्रियोंमें मनकी प्रधानताका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देवा: पितॄणां च सुता देवैर्लोका: समावृता:।
चराचरा नरश्रेष्ठ इत्येवमनुशुश्रुम॥ ९॥
अनुवाद
नरश्रेष्ठ! हमने सुना है कि देवता (श्रोत्र आदि इन्द्रियाँ) पितरों (पंचमहाभूतों) के पुत्र हैं, अर्थात् समस्त इन्द्रियाँ पंचमहाभूतों से उत्पन्न हुई हैं और वे सम्पूर्ण चराचर जगत के आश्रय में स्थित हैं, ऐसा हमने सुना है।
Narashrestha! We have heard that the gods (srotra etc. senses) are the sons of the ancestors (five great elements), that is, all the senses have originated from the five great elements and they are located under the shelter of the entire living world, this is what we have heard.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥