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mahabharat 12.311.6: वेद और वेदांगों के विशेषज्ञ विद्वान ब्रह्मा के समय की अवधि पर विचार करते हुए कहते हैं कि दस हजार कल्पों में से एक-चौथाई घटाने पर जो शेष बचता है, वही ब्रह्मा के एक दिन का मान है, अर्थात् साढ़े सात हजार कल्पों का एक दिन होता है।   |   mahabharat अध्याय 12.311: अव्यक्त, महत्तत्त्व, अहंकार, मन और विषयोंकी कालसंख्याका एवं सृष्टिका वर्णन तथा इन्द्रियोंमें मनकी प्रधानताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 311: अव्यक्त, महत्तत्त्व, अहंकार, मन और विषयोंकी कालसंख्याका एवं सृष्टिका वर्णन तथा इन्द्रियोंमें मनकी प्रधानताका प्रतिपादन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.311.6 
एतस्यापि च संख्यानं वेदवेदाङ्गपारगै:।
दशकल्पसहस्राणि पादोनान्यहरुच्यते॥ ६॥
 
 
अनुवाद
वेद और वेदांगों के विशेषज्ञ विद्वान ब्रह्मा के समय की अवधि पर विचार करते हुए कहते हैं कि दस हजार कल्पों में से एक-चौथाई घटाने पर जो शेष बचता है, वही ब्रह्मा के एक दिन का मान है, अर्थात् साढ़े सात हजार कल्पों का एक दिन होता है।
 
Expert scholars of Vedas and Vedangas, while considering the duration of Brahma's time, say that whatever remains after subtracting one-fourth from ten thousand kalpas, is the value of one day of Brahma, i.e., seven and a half thousand kalpas make one day of his.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)