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mahabharat 12.311.3: हमने सुना है कि औषधियों की रचना के पश्चात् भगवान ने ब्रह्माजी को उत्पन्न किया था, जो स्वर्ण अण्डे के अन्दर से प्रकट हुए थे। वे ही समस्त भूतों के मूल हैं॥3॥   |   mahabharat अध्याय 12.311: अव्यक्त, महत्तत्त्व, अहंकार, मन और विषयोंकी कालसंख्याका एवं सृष्टिका वर्णन तथा इन्द्रियोंमें मनकी प्रधानताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 311: अव्यक्त, महत्तत्त्व, अहंकार, मन और विषयोंकी कालसंख्याका एवं सृष्टिका वर्णन तथा इन्द्रियोंमें मनकी प्रधानताका प्रतिपादन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.311.3 
ततो ब्रह्माणमसृजद्धिरण्याण्डसमुद्भवम्।
सा मूर्ति: सर्वभूतानामित्येवमनुशुश्रुम॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हमने सुना है कि औषधियों की रचना के पश्चात् भगवान ने ब्रह्माजी को उत्पन्न किया था, जो स्वर्ण अण्डे के अन्दर से प्रकट हुए थे। वे ही समस्त भूतों के मूल हैं॥3॥
 
We have heard that after the creation of medicines, God had created Brahmaji, who had appeared from inside a golden egg. He is the origin of all ghosts. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)