Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.311.16-17: राजेन्द्र! मन इन्द्रियों द्वारा संचालित होकर समस्त विषयों की ओर गति करता है। इन्द्रियाँ उन विषयों को नहीं देखतीं, मन ही है जो उन्हें निरन्तर देखता रहता है। नेत्र मन की सहायता से ही रूप को देखते हैं, अपनी शक्ति से नहीं॥16-17॥ | mahabharat अध्याय 12.311: अव्यक्त, महत्तत्त्व, अहंकार, मन और विषयोंकी कालसंख्याका एवं सृष्टिका वर्णन तथा इन्द्रियोंमें मनकी प्रधानताका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मनश्चरति राजेन्द्र चारितं सर्वमिन्द्रियै:॥ १६॥
न चेन्द्रियाणि पश्यन्ति मन एवानुपश्यति।
चक्षु: पश्यति रूपाणि मनसा तु न चक्षुषा॥ १७॥
अनुवाद
राजेन्द्र! मन इन्द्रियों द्वारा संचालित होकर समस्त विषयों की ओर गति करता है। इन्द्रियाँ उन विषयों को नहीं देखतीं, मन ही है जो उन्हें निरन्तर देखता रहता है। नेत्र मन की सहायता से ही रूप को देखते हैं, अपनी शक्ति से नहीं॥16-17॥
Rajendra! The mind is driven by the senses and moves towards all objects. The senses do not see those objects, the mind is the one which continuously sees them. The eyes see the form only with the help of the mind, not with its own power.॥16-17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥