Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.311.13-14: पृथ्वीनाथ! इन सुन्दर वचनों तथा अन्य विषयों से, जो सदैव प्रवाह रूप में विद्यमान रहते हैं, प्रभावित होकर सम्पूर्ण प्राणी प्रतिदिन कभी एक-दूसरे से प्रेम करते हैं, कभी परस्पर कल्याण करने को तत्पर रहते हैं, कभी एक-दूसरे को नीचा दिखाने का प्रयत्न करते हैं, कभी एक-दूसरे से ईर्ष्या करते हैं और कभी एक-दूसरे पर आक्रमण भी करते हैं॥13-14॥ | mahabharat अध्याय 12.311: अव्यक्त, महत्तत्त्व, अहंकार, मन और विषयोंकी कालसंख्याका एवं सृष्टिका वर्णन तथा इन्द्रियोंमें मनकी प्रधानताका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पृथ्वीनाथ! इन सुन्दर वचनों तथा अन्य विषयों से, जो सदैव प्रवाह रूप में विद्यमान रहते हैं, प्रभावित होकर सम्पूर्ण प्राणी प्रतिदिन कभी एक-दूसरे से प्रेम करते हैं, कभी परस्पर कल्याण करने को तत्पर रहते हैं, कभी एक-दूसरे को नीचा दिखाने का प्रयत्न करते हैं, कभी एक-दूसरे से ईर्ष्या करते हैं और कभी एक-दूसरे पर आक्रमण भी करते हैं॥13-14॥
Prithvi Nath! Being influenced by these beautiful words and other subjects which are always present in the form of a flow, all living beings every day sometimes love each other, sometimes are ready to do mutual welfare, sometimes try to bring down each other, sometimes are jealous of each other and sometimes even attack each other.॥ 13-14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥