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mahabharat 12.310.9: यद्यपि कोई भी विषय आपके लिए अज्ञात नहीं है, फिर भी जब आप मुझसे पूछते हैं तो मुझे आपको बताना ही पड़ता है; क्योंकि जब कोई प्रश्न पूछता है तो ज्ञानी पुरुष को उसका उत्तर अवश्य देना चाहिए। यही सनातन धर्म है॥9॥   |   mahabharat अध्याय 12.310: याज्ञवल्क्यका राजा जनकको उपदेश—सांख्यमतके अनुसार चौबीस तत्त्वों और नौ प्रकारके सर्गोंका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 310: याज्ञवल्क्यका राजा जनकको उपदेश—सांख्यमतके अनुसार चौबीस तत्त्वों और नौ प्रकारके सर्गोंका निरूपण  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.310.9 
न तवाविदितं किंचिन्मां तु जिज्ञासते भवान्।
पृष्टेन चापि वक्तव्यमेष धर्म: सनातन:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि कोई भी विषय आपके लिए अज्ञात नहीं है, फिर भी जब आप मुझसे पूछते हैं तो मुझे आपको बताना ही पड़ता है; क्योंकि जब कोई प्रश्न पूछता है तो ज्ञानी पुरुष को उसका उत्तर अवश्य देना चाहिए। यही सनातन धर्म है॥9॥
 
Although no subject is unknown to you, still when you ask me I have to tell you; because when someone asks a question a knowledgeable person must answer it. This is the eternal religion.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)