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mahabharat 12.310.8: याज्ञवल्क्य बोले, "हे राजन! सुनो, तुम जो कुछ पूछ रहे हो, वह मैं तुम्हें योग का और विशेषतः सांख्य का परम गूढ़ ज्ञान बताता हूँ।" ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 12.310: याज्ञवल्क्यका राजा जनकको उपदेश—सांख्यमतके अनुसार चौबीस तत्त्वों और नौ प्रकारके सर्गोंका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.310.8 
याज्ञवल्क्य उवाच
श्रूयतामवनीपाल यदेतदनुपृच्छसि।
योगानां परमं ज्ञानं सांख्यानां च विशेषत:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
याज्ञवल्क्य बोले, "हे राजन! सुनो, तुम जो कुछ पूछ रहे हो, वह मैं तुम्हें योग का और विशेषतः सांख्य का परम गूढ़ ज्ञान बताता हूँ।" ॥8॥
 
Yagyavalkya said, "O King! Listen, whatever you are asking, I will tell you the most mysterious knowledge of Yoga and especially Sankhya." ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)