Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.310.7: मैं इन बातों को नहीं जानता, इसीलिए पूछ रहा हूँ। आप ज्ञान के भण्डार हैं, इसीलिए मैं आपसे ये विषय सुनना चाहता हूँ; जिससे सब संशय दूर हो जाएँ ॥7॥ | mahabharat अध्याय 12.310: याज्ञवल्क्यका राजा जनकको उपदेश—सांख्यमतके अनुसार चौबीस तत्त्वों और नौ प्रकारके सर्गोंका निरूपण । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अज्ञानात् परिपृच्छामि त्वं हि ज्ञानमयो निधि:।
तदहं श्रोतुमिच्छामि सर्वमेतदसंशयम्॥ ७॥
अनुवाद
मैं इन बातों को नहीं जानता, इसीलिए पूछ रहा हूँ। आप ज्ञान के भण्डार हैं, इसीलिए मैं आपसे ये विषय सुनना चाहता हूँ; जिससे सब संशय दूर हो जाएँ ॥7॥
I do not know these things, that is why I am asking. You are a storehouse of knowledge, that is why I want to hear about these topics from you; so that all doubts are dispelled. ॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥