Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.310.5-6: जनक बोले, "ब्रह्मर्षि! इन्द्रियाँ कितनी हैं? प्रकृति के कितने प्रकार हैं? अव्यक्त क्या है? और उससे भी परे परब्रह्म का स्वरूप क्या है? सृष्टि और प्रलय क्या है? और काल की गणना कैसे होती है? विप्रेन्द्र! कृपा करके हमें यह सब बताइए, क्योंकि हम आपकी कृपा चाहते हैं ॥5-6॥ | mahabharat अध्याय 12.310: याज्ञवल्क्यका राजा जनकको उपदेश—सांख्यमतके अनुसार चौबीस तत्त्वों और नौ प्रकारके सर्गोंका निरूपण । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जनक बोले, "ब्रह्मर्षि! इन्द्रियाँ कितनी हैं? प्रकृति के कितने प्रकार हैं? अव्यक्त क्या है? और उससे भी परे परब्रह्म का स्वरूप क्या है? सृष्टि और प्रलय क्या है? और काल की गणना कैसे होती है? विप्रेन्द्र! कृपा करके हमें यह सब बताइए, क्योंकि हम आपकी कृपा चाहते हैं ॥5-6॥
Janaka said, "Brahmarshi! How many senses are there? How many kinds of nature are there? What is the unmanifested? And beyond that, what is the form of the Supreme Brahman? What is creation and destruction? And how is time calculated? Viprendra! Kindly tell us all this, because we desire your mercy. ॥ 5-6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥