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mahabharat 12.310.4: एक बार देवरात के पुत्र राजा जनक ने रहस्य को समझने वाले श्रेष्ठ ऋषियों में श्रेष्ठ याज्ञवल्क्य से प्रश्न किया॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.310: याज्ञवल्क्यका राजा जनकको उपदेश—सांख्यमतके अनुसार चौबीस तत्त्वों और नौ प्रकारके सर्गोंका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.310.4 
याज्ञवल्क्यमृषिश्रेष्ठं दैवरातिर्महायशा:।
पप्रच्छ जनको राजा प्रश्नं प्रश्नविदां वरम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
एक बार देवरात के पुत्र राजा जनक ने रहस्य को समझने वाले श्रेष्ठ ऋषियों में श्रेष्ठ याज्ञवल्क्य से प्रश्न किया॥4॥
 
Once King Janak, the great son of Devarat, asked Yajnavalkya, the best sage among those who understood the mystery of the question. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)