Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.310.23: तत्पश्चात् ऊपर की ओर प्रवाहित प्राण तथा तिरछा समान, व्यान और उदान - ये सब प्रकट हुए। यह आठवाँ स्कन्ध है। इसे आर्जवक स्कन्ध कहते हैं॥23॥ | mahabharat अध्याय 12.310: याज्ञवल्क्यका राजा जनकको उपदेश—सांख्यमतके अनुसार चौबीस तत्त्वों और नौ प्रकारके सर्गोंका निरूपण । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात् ऊपर की ओर प्रवाहित प्राण तथा तिरछा समान, व्यान और उदान - ये सब प्रकट हुए। यह आठवाँ स्कन्ध है। इसे आर्जवक स्कन्ध कहते हैं॥23॥
Thereafter the prana whose flow is upward and the slanting saman, vyana and udana - all these appeared. This is the eighth canto. It is called the Arjavaka canto.॥23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥