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mahabharat 12.31.9: राजा को मनचाहा वरदान देकर संतुष्ट कीजिए। उन्हें जो चाहिए वो मिल जाए। अगर आपकी सहमति हो तो हम दोनों की तपस्या से उनकी मनोकामना पूरी हो।   |   mahabharat अध्याय 12.31: सुवर्णष्ठीवीके जन्म, मृत्यु और पुनर्जीवनका वृत्तान्त   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 31: सुवर्णष्ठीवीके जन्म, मृत्यु और पुनर्जीवनका वृत्तान्त  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.31.9 
वरेण च्छन्द्यतां राजा लभतां यद् यदिच्छति।
आवयोस्तपसा सिद्धिं प्राप्नोतु यदि मन्यसे॥ ९॥
 
 
अनुवाद
राजा को मनचाहा वरदान देकर संतुष्ट कीजिए। उन्हें जो चाहिए वो मिल जाए। अगर आपकी सहमति हो तो हम दोनों की तपस्या से उनकी मनोकामना पूरी हो।
 
‘Satisfy the king by granting him the desired boon. He should get whatever he wants. If you agree, then his wishes should be fulfilled by the penance of both of us.’
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)