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mahabharat 12.31.6: जब वर्षा ऋतु के चार महीने बीत गए और उस स्थान को छोड़ने का समय आ गया, तब पर्वत ने मुझसे कुछ समयोचित और अर्थपूर्ण वचन कहे -॥6॥   |   mahabharat अध्याय 12.31: सुवर्णष्ठीवीके जन्म, मृत्यु और पुनर्जीवनका वृत्तान्त   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 31: सुवर्णष्ठीवीके जन्म, मृत्यु और पुनर्जीवनका वृत्तान्त  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.31.6 
व्यतिक्रान्तासु वर्षासु समये गमनस्य च।
पर्वतो मामुवाचेदं काले वचनमर्थवत्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
जब वर्षा ऋतु के चार महीने बीत गए और उस स्थान को छोड़ने का समय आ गया, तब पर्वत ने मुझसे कुछ समयोचित और अर्थपूर्ण वचन कहे -॥6॥
 
When four months of the rainy season had passed and the time had come for us to leave that place, the mountain spoke to me some timely and meaningful words -॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)