Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.31.46-47: राजन! तुम भी अपने हृदय में उत्पन्न हुए इस शोक को दूर करो और भगवान श्रीकृष्ण तथा महातपस्वी व्यासजी के आदेशानुसार अपने पितरों के राज्य में आरोहण करके उसका भार वहन करो; फिर पुण्य देने वाले महान यज्ञों का अनुष्ठान करके इच्छित लोक को जाओगे ॥ 46-47॥ | mahabharat अध्याय 12.31: सुवर्णष्ठीवीके जन्म, मृत्यु और पुनर्जीवनका वृत्तान्त । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजन! तुम भी अपने हृदय में उत्पन्न हुए इस शोक को दूर करो और भगवान श्रीकृष्ण तथा महातपस्वी व्यासजी के आदेशानुसार अपने पितरों के राज्य में आरोहण करके उसका भार वहन करो; फिर पुण्य देने वाले महान यज्ञों का अनुष्ठान करके इच्छित लोक को जाओगे ॥ 46-47॥
King! You too should remove this sorrow that has arisen in your heart and, as instructed by Lord Krishna and the great ascetic Vyasa, ascend the kingdom of your forefathers and bear its burden; then, after performing the great yajnas that give merit, you will go to the desired world. ॥ 46-47॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि स्वर्णष्ठीविसम्भवोपाख्याने एकत्रिंशोऽध्याय:॥ ३१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें स्वर्णष्ठीवीके जन्मका उपाख्यानविषयक इकतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३१॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥