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mahabharat 12.31.42: तत्पश्चात् महान् पराक्रमी कुमार सुवर्णस्थि जीवित हो उठे और उन्होंने अपने पिता और माता के हृदय को प्रसन्न किया ॥42॥   |   mahabharat अध्याय 12.31: सुवर्णष्ठीवीके जन्म, मृत्यु और पुनर्जीवनका वृत्तान्त   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 31: सुवर्णष्ठीवीके जन्म, मृत्यु और पुनर्जीवनका वृत्तान्त  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  12.31.42 
तत ऊर्ध्वं कुमारस्तु स्वर्णष्ठीवी महायशा:।
चित्तं प्रसादयामास पितुर्मातुश्च वीर्यवान्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महान् पराक्रमी कुमार सुवर्णस्थि जीवित हो उठे और उन्होंने अपने पिता और माता के हृदय को प्रसन्न किया ॥42॥
 
Thereafter, the great and powerful Kumar Suvarnasthi came alive and pleased the hearts of his father and mother. 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)