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mahabharat 12.31.37: रक्त से लथपथ बालक को गोद में लेकर व्यथित राजा संजय निराशा में विलाप करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 12.31: सुवर्णष्ठीवीके जन्म, मृत्यु और पुनर्जीवनका वृत्तान्त   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 31: सुवर्णष्ठीवीके जन्म, मृत्यु और पुनर्जीवनका वृत्तान्त  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  12.31.37 
स तमुत्सङ्गमारोप्य परिपीडितमानस:।
पुत्रं रुधिरसंसिक्तं पर्यदेवयदातुर:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
रक्त से लथपथ बालक को गोद में लेकर व्यथित राजा संजय निराशा में विलाप करने लगे।
 
Taking the blood-soaked child in his lap, the distressed King Sanjaya began to lament in despair.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)