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mahabharat 12.31.35: रोती हुई धाय की करुण पुकार सुनकर राजा संजय स्वयं दौड़कर उस स्थान पर आये।   |   mahabharat अध्याय 12.31: सुवर्णष्ठीवीके जन्म, मृत्यु और पुनर्जीवनका वृत्तान्त   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 31: सुवर्णष्ठीवीके जन्म, मृत्यु और पुनर्जीवनका वृत्तान्त  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  12.31.35 
धात्र्यास्तु निनदं श्रुत्वा रुदत्या: परमार्तवत्।
अभ्यधावत तं देशं स्वयमेव महीपति:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
रोती हुई धाय की करुण पुकार सुनकर राजा संजय स्वयं दौड़कर उस स्थान पर आये।
 
Hearing the wailing cry of the weeping nurse, King Sanjaya himself came running to the place. 35.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)