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mahabharat 12.31.30: देवताओं के राजा के समान पराक्रमी पुत्र पाकर संजय अपनी रानी सहित बहुत प्रसन्न हुए और वे सदा के लिए वन में रहने लगे।   |   mahabharat अध्याय 12.31: सुवर्णष्ठीवीके जन्म, मृत्यु और पुनर्जीवनका वृत्तान्त   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.31.30 
सृंजयोऽपि सुतं प्राप्य देवराजसमद्युतिम्।
हृष्ट: सान्त:पुरो राजा वननित्यो बभूव ह॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
देवताओं के राजा के समान पराक्रमी पुत्र पाकर संजय अपनी रानी सहित बहुत प्रसन्न हुए और वे सदा के लिए वन में रहने लगे।
 
Sanjaya along with his queen were very happy to get a son as valiant as the king of gods and they started living in the forest forever.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)