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mahabharat 12.31.3: नारदजी बोले - हे महारथी! इस विषय में भगवान श्रीकृष्ण ने जो कुछ कहा है, वह सत्य है। इस विषय में जो कुछ शेष रह गया है, वह मैं आपके प्रश्न के अनुसार आपको बता रहा हूँ।   |   mahabharat अध्याय 12.31: सुवर्णष्ठीवीके जन्म, मृत्यु और पुनर्जीवनका वृत्तान्त   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 31: सुवर्णष्ठीवीके जन्म, मृत्यु और पुनर्जीवनका वृत्तान्त  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.31.3 
नारद उवाच
एवमेतन्महाबाहो यथायं केशवोऽब्रवीत् ।
कार्यस्यास्य तु यच्छेषं तत् ते वक्ष्यामि पृच्छत:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
नारदजी बोले - हे महारथी! इस विषय में भगवान श्रीकृष्ण ने जो कुछ कहा है, वह सत्य है। इस विषय में जो कुछ शेष रह गया है, वह मैं आपके प्रश्न के अनुसार आपको बता रहा हूँ।
 
Naradji said - O great warrior! Whatever Lord Krishna has said in this matter is true. Whatever is left in this matter, I am telling you according to your question.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)