Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.31.20-21: तब मैंने उस दीन राजा से कहा- 'महाराज! संकट के समय मेरा स्मरण करना। मैं तुम्हारे पुत्र को तुम्हें पुनः मिला दूँगी। पृथ्वीनाथ! तुम चिन्ता न करो। मैं उसी रूप में यमराज के चंगुल में पड़े तुम्हारे प्रिय पुत्र को वापस लाकर तुम्हें दे दूँगी।'॥ 20-21॥ | mahabharat अध्याय 12.31: सुवर्णष्ठीवीके जन्म, मृत्यु और पुनर्जीवनका वृत्तान्त । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तमहं नृपतिं दीनमब्रवं पुनरेव च।
स्मर्तव्योऽस्मि महाराज दर्शयिष्यामि ते सुतम्॥ २०॥
अहं ते दयितं पुत्रं प्रेतराजवशं गतम्।
पुनर्दास्यामि तद्रूपं मा शुच: पृथिवीपते॥ २१॥
अनुवाद
तब मैंने उस दीन राजा से कहा- 'महाराज! संकट के समय मेरा स्मरण करना। मैं तुम्हारे पुत्र को तुम्हें पुनः मिला दूँगी। पृथ्वीनाथ! तुम चिन्ता न करो। मैं उसी रूप में यमराज के चंगुल में पड़े तुम्हारे प्रिय पुत्र को वापस लाकर तुम्हें दे दूँगी।'॥ 20-21॥
Then I said to that humbled king- 'Maharaj! Remember me in times of trouble. I will reunite your son with you. Prithvinath! Don't worry. I will bring back your beloved son who is in the clutches of Yamraj in that form and give him back to you.'॥ 20-21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥