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mahabharat 12.31.16: पर्वत ने कहा, "हे राजन! आपकी इच्छा अवश्य पूर्ण होगी, किन्तु वह पुत्र अधिक समय तक जीवित नहीं रहेगा, क्योंकि आपके हृदय में देवताओं के राजा इन्द्र को परास्त करने का संकल्प है।   |   mahabharat अध्याय 12.31: सुवर्णष्ठीवीके जन्म, मृत्यु और पुनर्जीवनका वृत्तान्त   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 31: सुवर्णष्ठीवीके जन्म, मृत्यु और पुनर्जीवनका वृत्तान्त  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.31.16 
पर्वत उवाच
भविष्यत्येष ते कामो न त्वायुष्मान् भविष्यति।
देवराजाभिभूत्यर्थं संकल्पो ह्येष ते हृदि॥ १६॥
 
 
अनुवाद
पर्वत ने कहा, "हे राजन! आपकी इच्छा अवश्य पूर्ण होगी, किन्तु वह पुत्र अधिक समय तक जीवित नहीं रहेगा, क्योंकि आपके हृदय में देवताओं के राजा इन्द्र को परास्त करने का संकल्प है।
 
The mountain said, "O King! Your wish will be fulfilled, but that son will not live long because you have a resolve in your heart to defeat the king of gods, Indra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)