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mahabharat 12.31.11: हे प्रभु! आपके द्वारा किए गए सरल आतिथ्य से हम दोनों बहुत प्रसन्न हैं। हम आपको आदेश देते हैं कि आप विचार करें और अपनी इच्छानुसार कोई भी वर मांग लें॥ 11॥   |   mahabharat अध्याय 12.31: सुवर्णष्ठीवीके जन्म, मृत्यु और पुनर्जीवनका वृत्तान्त   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 31: सुवर्णष्ठीवीके जन्म, मृत्यु और पुनर्जीवनका वृत्तान्त  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.31.11 
प्रीतौ स्वो नृप सत्कारैर्भवदार्जवसम्भृतै:।
आवाभ्यामभ्यनुज्ञातो वरं नृवर चिन्तय॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! आपके द्वारा किए गए सरल आतिथ्य से हम दोनों बहुत प्रसन्न हैं। हम आपको आदेश देते हैं कि आप विचार करें और अपनी इच्छानुसार कोई भी वर मांग लें॥ 11॥
 
'Lord! We both are very pleased with the simple hospitality you have shown us. We command you to think and ask for any boon of your choice.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)