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mahabharat 12.309.25: भीष्म कहते हैं- युधिष्ठिर! राजकुमार वसुमान उत्तम स्वभाव के थे। ऋषि की बात सुनकर उन्होंने अपने मन को कामनाओं से हटाकर धर्म में बुद्धि लगा दी।   |   mahabharat अध्याय 12.309: जनकवंशी वसुमान‍्को एक मुनिका धर्मविषयक उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 309: जनकवंशी वसुमान‍्को एक मुनिका धर्मविषयक उपदेश  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  12.309.25 
भीष्म उवाच
स तु स्वभावसम्पन्नस्तच्छ्रुत्वा मुनिभाषितम्।
विनिवर्त्य मन: कामाद् धर्मे बुद्धिं चकार ह॥ २५॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं- युधिष्ठिर! राजकुमार वसुमान उत्तम स्वभाव के थे। ऋषि की बात सुनकर उन्होंने अपने मन को कामनाओं से हटाकर धर्म में बुद्धि लगा दी।
 
Bhishma says- Yudhishthira! Prince Vasumaan was blessed with a good nature. After listening to the sage's advice, he removed his mind from desires and focused his intellect on religion. 25.
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि जनकानुशासने नवाधिकत्रिशततमोऽध्याय:॥ ३०९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें जनकवंशी वसुमान‍्को उपदेशविषयक तीन सौ नवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३०९॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)