Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.309.22: जो मनुष्य सत्पुरुषों की संगति करता है, वह उनके तेज से ऐसा समाधान प्राप्त कर सकता है, जिससे इस लोक में भी कल्याण हो और परलोक में भी। उत्तम धैर्य (मन की स्थिरता) ही कल्याण का मूल है॥ 22॥ | mahabharat अध्याय 12.309: जनकवंशी वसुमान्को एक मुनिका धर्मविषयक उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तेजसा शक्यते प्राप्तुमुपाय: सहचारिणा।
इह च प्रेत्य च श्रेयस्तस्य मूलं धृति: परा॥ २२॥
अनुवाद
जो मनुष्य सत्पुरुषों की संगति करता है, वह उनके तेज से ऐसा समाधान प्राप्त कर सकता है, जिससे इस लोक में भी कल्याण हो और परलोक में भी। उत्तम धैर्य (मन की स्थिरता) ही कल्याण का मूल है॥ 22॥
One who keeps company with good men, can get such a solution by their brilliance or glory, which will bring welfare in this world as well as the next. Excellent patience (steadiness of mind) is the root of welfare.॥ 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥