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mahabharat 12.309.21: अधीर राजा! धैर्य का आश्रय लो। मूर्ख! बुद्धिमान बनो। तुम सदैव अशांत रहते हो। अब से शांत हो जाओ और अब तक मूर्खों जैसा आचरण किया है, अब विद्वानों जैसा आचरण करो। 21॥   |   mahabharat अध्याय 12.309: जनकवंशी वसुमान‍्को एक मुनिका धर्मविषयक उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 309: जनकवंशी वसुमान‍्को एक मुनिका धर्मविषयक उपदेश  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.309.21 
अधृतात्मन् धृतौ तिष्ठ दुर्बुद्धे बुद्धिमान् भव।
अप्रशान्त: प्रशाम्य त्वमप्राज्ञ: प्राज्ञवच्चर॥ २१॥
 
 
अनुवाद
अधीर राजा! धैर्य का आश्रय लो। मूर्ख! बुद्धिमान बनो। तुम सदैव अशांत रहते हो। अब से शांत हो जाओ और अब तक मूर्खों जैसा आचरण किया है, अब विद्वानों जैसा आचरण करो। 21॥
 
Impatient king! Take refuge in patience. Fool! Be wise. You are always restless. Calm down from now on and behave like a fool till now, now behave like a scholar. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)