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mahabharat 12.309.20: अपने वर्ण और आश्रम के अनुसार सब जगह सब लोग जो कर्म कर रहे हैं, उनका आदर करो। तुम भी अपने धर्मानुसार, अपनी इच्छानुसार, जो कर्म तुम्हें प्रिय हो, उसे करो।॥ 20॥   |   mahabharat अध्याय 12.309: जनकवंशी वसुमान‍्को एक मुनिका धर्मविषयक उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 309: जनकवंशी वसुमान‍्को एक मुनिका धर्मविषयक उपदेश  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.309.20 
सर्वं सर्वेण सर्वत्र क्रियमाणं च पूजय।
स्वधर्मे यत्र रागस्ते कामं धर्मो विधीयताम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
अपने वर्ण और आश्रम के अनुसार सब जगह सब लोग जो कर्म कर रहे हैं, उनका आदर करो। तुम भी अपने धर्मानुसार, अपनी इच्छानुसार, जो कर्म तुम्हें प्रिय हो, उसे करो।॥ 20॥
 
Respect all types of work being done by everyone everywhere according to your Varna and Ashrama. You too should perform whatever work you are fond of according to your Dharma, as per your wish.॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)