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mahabharat 12.309.17: जैसे शरीर पर लगी हुई थोड़ी-सी धूल को मनुष्य आसानी से पोंछकर साफ कर सकता है; किन्तु यदि बहुत अधिक मैल लग जाए, तो उसे बड़े प्रयत्न से ही दूर किया जा सकता है। इसी प्रकार छोटा पाप भी थोड़े प्रयत्न से और बड़ा पाप भी बड़े प्रायश्चित से ही दूर किया जा सकता है। ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 12.309: जनकवंशी वसुमान‍्को एक मुनिका धर्मविषयक उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 309: जनकवंशी वसुमान‍्को एक मुनिका धर्मविषयक उपदेश  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.309.17 
लीलयाल्पं यथा गात्रात् प्रमृज्यात् तु रज: पुमान्।
बहुयत्नेन च महत् पापनिर्हरणं तथा॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जैसे शरीर पर लगी हुई थोड़ी-सी धूल को मनुष्य आसानी से पोंछकर साफ कर सकता है; किन्तु यदि बहुत अधिक मैल लग जाए, तो उसे बड़े प्रयत्न से ही दूर किया जा सकता है। इसी प्रकार छोटा पाप भी थोड़े प्रयत्न से और बड़ा पाप भी बड़े प्रायश्चित से ही दूर किया जा सकता है। ॥17॥
 
Just as a little dust on the body can be easily removed by a person by wiping it off; but if a lot of dirt gets stuck, it can be removed only with great effort. Similarly, a small sin can be removed with a little effort and a big sin can be removed only with great atonement. ॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)