Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.309.15: जो स्त्री अपनी ही जाति के कुलीन कुल में जन्म लेती है और अपने पति द्वारा आदर पाती है, वह श्रेष्ठ योनि मानी जाती है। अतः ऐसी माता से उत्पन्न पुरुष जन्म से ही पवित्र होता है। जो ब्राह्मण ऋग्वेद, यजुस् और सामवेद का विद्वान है और जो सदैव छह कर्मों (तर्पण, अध्ययन, अध्यापन, दान देना और ग्रहण करना) का पालन करता है, वह कर्म की दृष्टि से पवित्र और श्रेष्ठ माना जाता है।॥15॥ | mahabharat अध्याय 12.309: जनकवंशी वसुमान्को एक मुनिका धर्मविषयक उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सत्कृता चैकपत्नी च जात्या योनिरिहेष्यते।
ऋग्यजु:सामगो विद्वान् षट्कर्मा पात्रमुच्यते॥ १५॥
अनुवाद
जो स्त्री अपनी ही जाति के कुलीन कुल में जन्म लेती है और अपने पति द्वारा आदर पाती है, वह श्रेष्ठ योनि मानी जाती है। अतः ऐसी माता से उत्पन्न पुरुष जन्म से ही पवित्र होता है। जो ब्राह्मण ऋग्वेद, यजुस् और सामवेद का विद्वान है और जो सदैव छह कर्मों (तर्पण, अध्ययन, अध्यापन, दान देना और ग्रहण करना) का पालन करता है, वह कर्म की दृष्टि से पवित्र और श्रेष्ठ माना जाता है।॥15॥
A woman who is born in a noble family of her own caste and is respected by her husband is considered to be the best yoni (species). Hence, one who is born from such a mother is pure by birth. A Brahmin who is a scholar of Rigveda, Yajus and Samveda and who always performs the six karmas (offerings, studying, teaching, giving and accepting gifts) is considered to be pure and the best person in terms of karma.॥15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥