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mahabharat 12.309.14: जो दयालु, धर्मपरायण, जितेन्द्रिय, सत्यवादी, सरल आचरण वाला, वेदों का विद्वान, जन्म और कर्म से शुद्ध हो, वही ब्राह्मण दान लेने के लिए उत्तम पात्र है ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 12.309: जनकवंशी वसुमान‍्को एक मुनिका धर्मविषयक उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 309: जनकवंशी वसुमान‍्को एक मुनिका धर्मविषयक उपदेश  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.309.14 
अनृशंस: शुचिर्दान्त: सत्यवागार्जवे स्थित:।
योनिकर्मविशुद्धश्च पात्रं स्याद् वेदविद् द्विज:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जो दयालु, धर्मपरायण, जितेन्द्रिय, सत्यवादी, सरल आचरण वाला, वेदों का विद्वान, जन्म और कर्म से शुद्ध हो, वही ब्राह्मण दान लेने के लिए उत्तम पात्र है ॥14॥
 
Only a Brahmin who is kind, pious, Jitendriya, truthful, simple-behaving and a scholar of the Vedas, pure by birth and action, is the best candidate for receiving charity. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)