Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.309.11: पहले निवृत्ति और कर्ममार्ग के गुण-दोषों का भली-भाँति निश्चय कर लो; फिर मन को एकाग्र करके मन, वाणी और शरीर से किए जाने वाले धर्म में श्रद्धा रखो (अर्थात् श्रद्धापूर्वक धर्म का पालन करना आरम्भ करो)।॥ 11॥ | mahabharat अध्याय 12.309: जनकवंशी वसुमान्को एक मुनिका धर्मविषयक उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मनोवाक्कायिके धर्मे कुरु श्रद्धां समाहित:।
निवृत्तौ वा प्रवृत्तौ वा सम्प्रधार्य गुणागुणान्॥ ११॥
अनुवाद
पहले निवृत्ति और कर्ममार्ग के गुण-दोषों का भली-भाँति निश्चय कर लो; फिर मन को एकाग्र करके मन, वाणी और शरीर से किए जाने वाले धर्म में श्रद्धा रखो (अर्थात् श्रद्धापूर्वक धर्म का पालन करना आरम्भ करो)।॥ 11॥
First, decide well about the merits and demerits of the path of retirement and action; then concentrate your mind and have faith in the Dharma performed by the mind, speech and body (i.e. start following the Dharma with faith).॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥